चैत्र नवरात्रि का होता है विशेष महत्व, जानें
चैत्र नवरात्रि इस बार ये 18 मार्च से शुरू हो रही हैं और ये 25 मार्च तक चलेंगी। गर्मियों की शुरूआत में आने वाले चैत्र नवरात्रि का भी अपना विशेष महत्व है। इस बार चैत्र नवरात्रि 8 दिन की है क्योंकि इस बार सप्तमी और अष्टमी तिथि एक साथ हैं। नवरात्र के दिनों में मनुष्य अपनी भौतिक, आध्यात्मिक, यांत्रिक और तांत्रिक इच्छाओं को पूर्ण करने की कामना से व्रतोपवास रखता है और ईश्वरीय शक्ति इन इच्छाओं को पूर्ण करने में सहायक होती है। इसलिए आध्यात्मिक दृष्टि से नवरात्र का अपना महत्व है।
ज्योतिष की दृष्टि से चैत्र नवरात्र का विशेष महत्व है क्योंकि इस नवरात्र के दौरान सूर्य का राशि परिवर्तन होता है। सूर्य 12 राशियों में भ्रमण पूरा करते हैं और फिर से अगला चक्र पूरा करने के लिए पहली राशि मेष में प्रवेश करते हैं। सूर्य और मंगल की राशि मेष दोनों ही अग्नि तत्व वाले हैं इसलिए इनके संयोग से गर्मी की शुरुआत होती है। चैत्र नवरात्र से नववर्ष के पंचांग की गणना शुरू होती है।
इन उपायों को कर मिलेगी सुख-समृद्धि, होगा धन लाभ
1. धन प्राप्ति के लिए आप घर में एक शांत कमरे में उत्तर की दिशा की ओर अपना मुंह करके पीले आसन पर बैठे इसके बाद आप अपने सामने तेल के 9 दीपक जलाएं। ध्यान रहे कि ये साधनाकाल तक जलते रहने चाहिए। इन 9 दीपकों के सामने लाल चावल की एक ढेरी बनाकर उस पर एक श्रीयंत्र रख लें। इस श्रीयंत्र का कुंकुम, फूल, धूप, तथा दीप से पूजन करें। इस प्रयोग से आपको जल्दी ही अचानक धन लाभ होगा।
2. नौकरी के लिए आप सुबह जल्दी उठकर स्नान करने के बाद सफेद रंग का सूती आसन बिछाकर उस पर पूर्व दिशा की ओर मुंह करके बैठ जाएं। अब अपने ठीक सामने पीला कपड़ा बिछाकर उस पर 108 मनकों वाली स्फटिक की माला रख दें। इस पर केसर व इत्र छिड़क कर माला का पूजन करें। माला को धूप, दीप और अगरबत्ती दिखाकर ऊं ह्लीं वाग्वादिनी भगवती मम कार्य सिद्धि कुरु कुरु फट् स्वाहा मंत्र का 31 बार जाप करें।
3. मनोकामना पूरी करने के लिए आप किसी शिव मंदिर में जाएं। वहां शिवलिंग पर दूध, दही, घी, शहद और शक्कर चढ़ाते हुए उसे अच्छी तरह से स्नान कराएं। इसके बाद शुद्ध जल चढ़ाएं और पूरे मंदिर में झाड़ू लगाकर उसे साफ करें। अब महादेवजी की चंदन, पुष्प एवं धूप, दीप आदि से पूजा-अर्चना करें। इससे आपकी मनोकामना बहुत जल्दी पूर्ण होगी।
4. घर परिवार में समस्या के लिए आप सुबह स्नान आदि कर सब नर करहिं परस्पर प्रीति। चलहिं स्वधर्म निरत श्रुति नीति।। मंत्र को पढ़ते हुए 108 बार अग्नि में घी से आहुतियां दें। इससे यह मंत्र सिद्ध हो जाएगा। इससे जीवन भर परिवार में मधुर संबंध बने रहेंगे।

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